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इंटरनेट बंद होने से जनजीवन प्रभावित। सिर्फ बीएसएनएल का ब्रांड बैंड ही चला

शमशुद दुहा की कलम से,,,,,,,,,,,

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इंटरनेट बंद होने से जनजीवन प्रभावित। सिर्फ बीएसएनएल का ब्रांड बैंड ही चला।
राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया और पुलिस के आला अधिकारी इस बात के लिए पीठ थपथपा सकते हैं कि 14 जुलाई को प्रदेशभर में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गई। इसी तरह 15 जुलाई को भी यही परीक्षा प्रदेश भर में हुई है। परीक्षा पुलिस की थी, लेकिन इसका खामियाजा आम आदमी को उठाना पड़ा। देश में डिजीटल इंडिया के अभियान के तहत अब हर व्यक्ति मोबाइल और इंटरनेट पर निर्भर हो गया है। इसे अफसोसनाक ही कहा जाएगा कि कांस्टेबल परीक्षा के लिए पुलिस ने डंडे के जोर पर राजस्थान भर में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया चूंकि पुलिस की परीक्षा प्रातः 10 से दोपहर 2 बजे तक तक सायं 3 से 5 बजे तक होनी थी। इसलिए प्रदेशभर में प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे तक नेट सेवाओं को बंद रखा गया। मोबाइल और कम्प्यूटर पर नेट बंद हो जाने से आम व्यक्ति का जनजीवन प्रभावित हुआ। ई-मित्र सेवा केन्द्र पूरी तरह ठप रही। तो आम व्यक्ति भी अपने संदेशों का आदान प्रदान नहीं कर सका। अब पानी और बिजली के बिल भी ऑनलाइन जमा होते है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेट बंद होने से कितनी परेशानी हुई होगी। प्रदेश और देश में परीक्षा तो आए दिन होती है। सवाल उठता है कि हर परीक्षा के लिए नेट सेवाओं को बंद किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि परीक्षा में नकल और बेईमानी को रोकने के लिए नेट सेवाओं को बंद रखा गया। क्या पुलिस के पास और कोई विकल्प नहीं था जिससे परीक्षार्थियों की बेईमानी को रोका जा सके? जो युवा कांस्टेबल परीक्षा में उत्तीर्ण होगा वह नौकरी में बेईमानों को पकड़ने का ही काम करेगा। लेकिन पुलिस ने तो कांस्टेबल की परीक्षा में इन्हीं बुराईयों को रोकने के लिए नेट सेवाओं को बंद किया है।

आखिर पुलिस की नींव (कांस्टेबल) पर इतना अविश्वास क्यों?

नेट बंद करने और परीक्षा केन्द्रों पर जैमर तक लगाने के बाद पुलिस ने भले ही परीक्षा सम्पन्न करवा ली हो, लेकिन पुलिस के इन तौर तरीके को लेकर आम लोगों में नाराजगी है। सबसे ज्यादा गुस्सा युवाओं में है। राजस्थान में 14 जुलाई को जो हालात रहे वैसे ही 15 जुलाई को भी रहा । अनेक विद्यार्थी अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रवेश पत्र तक डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं। 14 जुलाई को प्रदेश भर में बीएसएनएल का ब्रॉडबैंड चर्चा में रहा। जिन उपभोक्ताओं ने ब्रॉडबैंड की सुविधा ले रखी है उनका काम सामान्य दिन की तरह चला। असल में पुलिस ने नेट बंदी से बीएसएनएल को मुक्त रखा है।

रेलवे स्टेशन पर भीड़ः

नेट बंदी के दौरान अजमेर के रेलवे स्टेशन पर मोबाइल चलाने वाले युवाओं का जमघट देखा गया। असल में रेलवे स्टेशन पर भी रेलवे की स्वयं की नेट सेवाएं चालू थी। रेलवे स्टेशन के परिधि में आने के बाद कोई भी उपभोक्ता अपना मोबाइल नम्बर दर्ज कर नेट की सुविधा मुफ्त में ले सकता है। इस सुविधा का शहर के युवाओं ने जमकर फायदा उठाया।

बंधक बने रहे शिक्षा कर्मीः

कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान हजारों शिक्षा कर्मी अपने ही संस्थान में बंधक बने रहे। असल में पुलिस के अधिकारियों ने परीक्षा केन्द्र से संबंधित शिक्षण संस्थान के शिक्षा कर्मियों को निर्देश दिए थे कि प्रातः 7 बजे ही संस्थान में उपस्थित हो जाए। चूंकि दूसरी पारी की परीक्षा सायं 5 बजे समाप्त हुई इसलिए शिक्षा कर्मी सायं सात बजे तक कार्य से मुक्त हो पाए। ऐसे में शिक्षा कर्मियों को दिन भर अपने ही संस्थान में बंधक रहना पड़ा। जिन शिक्षा कर्मियों की ड्यूटी प्रथम पारी में थी उन्हें ही द्वितीय पारी के लिए पाबंद किया गया था। किसी भी शिक्षा कर्मी को मोबाइल फोन रखने की इजाजत भी नहीं थी। ऐसे में शिक्षा कर्मी अपने परिवार वालों से सम्पर्क भी नहीं कर सके।

 

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