National View

चुनावी तैयारियां चरम पर पहुंचने लगी है। जिस अहम कदम का सबको बेसब्री से इंतजार रहता है उसका भी दौर शुरू हो चुका है।

चुनावी तैयारियां चरम पर पहुंचने लगी है। जिस अहम कदम का सबको बेसब्री से इंतजार रहता है उसका भी दौर शुरू हो चुका है। समझ ही गये होंगे आप…!
जी बिल्कुल सही…वही जो इन दिनों समाचारों और सभी लोगो की चर्चा का सबसे पसंदीदा विषय बना हुआ है, हम इसे कुछ लोगो की चिंता का विषय भी कहे तो निःसंदेह गलत तो नही होगा…!
वो विषय है..*टिकट वितरण प्रणाली*
सभी पार्टियों ने अपनी अलग अलग नीतिया बनाई है बतायी है।
लेकिन फिर भी सभी मे समानता ही दिखाई पड़ रही है। हो भी क्यों ना आखिर इसी का नाम राजनीति है। कहीं जातिगत आधार तो कहीं पुराने पत्तो पर दांव खेला जा रहा है।

जैसे जैसे पार्टियों से टिकट प्राप्त करने वालो की सूचियां सामने आती जा रही है वैसे ही बवाल सा मचता जा रहा है।

एक तरफ जिनको टिकट नही मिला वे नाराज कार्यकर्ता अपना पार्टी प्रेम त्याग कर अन्यत्र रुख करते दिख रहे है तो वहीं दूसरी ओर इन नाराज कार्यकर्ताओ को दूसरी पार्टियों से बेहद अपनत्व मिलता दिख रहा है।
ये तो रही नेताओ ओर पार्टियों की बात…!

इन सब बातों से विपरीत भी एक विशाल समूह है जो अभी भी असमंजस में है कि आखिर लड़ाई टिकट की है या जनता के भलाई के लिए??

एक सवाल जनता जनार्दन से भी..जो सब देख रही है समझ रही है।
क्या ये टिकट वितरण उचित हो रहा है??

Journlist :- Lucky Parashar

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