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मौत की मर्यादा

शमशुद दुहा की कलम से ,,,,,,,,

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मौत की मर्यादा

दोस्तो जब से whatsapp आया है एक घटिया फैशन का दोर चल पडा है की कंही भी सडक पर हाइवे पर चोराहा पर गली मे कंही भी ACCIDENT होता है
तो आज के पढे लिखे और अपने आप को समझदार मानने वाले लोग एक्सीडेंट में मारे गये बदनसीब लोगो की तस्वीर खिंच के जल्दी से जल्दी दोस्तों को भेजते हैं।
दोस्तों एक्सीडेंट ये कोई फोटो सेशन नही है।
ये मनोरंजन का वक्त नही है……
ये तो किसी मां की ऊजडी हूई ममता है……
तो किसी का लुटा हुआ सुहाग है….
तो कोई बहन का खोया हुआ प्यार है….।
और दोस्तो जिन्दगी की तरह मौत की भी एक मर्यादा होती है।
और कुछ लोग तो मारी गई मां बहनो की बिना कपडो की तस्वीर भेजते है…..
तब तो लगता है की हम इंसान है ही नही।
अरे दोस्तो वो औरत या बेटी भी किसी के घर की आबरु है।
दोस्तो मनोरंजन के लिये और बहुत कुछ है……..
मौत को तो छोड दो……
बुजुर्गो ने सिखाया है लाश देखो तो उस पर कफन डाल दो…….
लाश को whatsapp पे नही……
जिन्दो का मान रखो न रखो ….मुर्दो का जरूर रखो ..
बुरा लगे माफ करना…..

अच्छा लगे तो शेयर जरूर करना
Editor :- Shamshud duha

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