अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए लोन की सीमा 35 लाख तक बढ़ी, 10 लाख से कम आबादी वाली जगहों पर 25 लाख की लिमिट

आरबीआई ने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग के तहत लोन की लिमिट बढ़ाई।
Nationalview.in| Last Modified – Jun 06, 2018, 11:16 PM

Shamshud Duha

10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में पीएसएल के तहत 35 लाख तक का होम लोन मिलेगा।- सिंबॉलिक
o पीएसएल के तहत लोन के लिए घर की कुल लागत 45 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
o पीएसएल के तहत लोन की लिमिट बढ़ने से हाउसिंग सेक्टर में तेजी की उम्मीद
नई दिल्ली. आरबीआई ने अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (पीएसएल) के तहत लोन की लिमिट बढ़ा दी है। 10 लाख या इससे ज्यादा आबादी वाले शहरों में इसके तहत 35 लाख तक का लोन ले सकेंगे। पहले 28 लाख तक की सीमा थी। वहीं, 10 लाख से कम आबादी वाली जगहों के लिए लिमिट 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी है। हालांकि, इन दोनों मामलों में मकान की कुल लागत 45 लाख और 30 लाख से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग क्या है ?
– बैंकों को देश के विकास में योगदान का लक्ष्य दिया जाता है। इसमें आरबीआई के नियमों के मुताबिक बैंकों को अपने कुल लोन का एक हिस्सा विकास के कामों के लिए देना होता है। इसमें बड़ी आबादी वाले और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से संबंधित सेक्टर शामिल हैं। इसका मकसद ऐसे सेक्टर के लोगों को रियायती दरों पर लोन उपलब्ध करवाना होता है। इसके लिए ब्याज दरों में समय-समय पर बदलाव होता रहता है।
प्रायोरिटी सेक्टर में शामिल कैटेगरी
एग्रीकल्चर
लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग
एजुकेशन
हाउसिंग
सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर
रिन्यूएबल एनर्जी
अन्य
– इन श्रेणियों के लिए बैंकों को आरबीआई की ओर से दिए गए टार्गेट के मुताबिक लोन देना होता है। अगर बैंक लक्ष्य हासिल नहीं कर पाते हैं तो उन्हें जुर्माने के तौर पर नाबार्ड के रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड में योगदान देना पड़ता है।
आरबीआई जून के आखिर तक गाइडलाइंस जारी करेगा
– आरबीआई ने इसके तहत अब हाउसिंग कैटेगरी के लिए लोन की सीमा बढ़ा दी है। हालांकि, इस बारे में डिटेल गाइडलाइंस जून के आखिर तक जारी की जाएंगी।
हाउसिंग सेक्टर की ग्रोथ तेज होगी, रोजगार बढ़ेंगे: एक्सपर्ट
– बैंकिंग सेक्टर एक्सपर्ट आर के गौतम के मुताबिक पीएसएल के तहत लोन की लिमिट बढ़ने से हाउसिंग प्रोजेक्ट तेज होंगे। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को घर तो मिलेगा ही साथ ही सीमित अवधि में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
घर खरीदारों को मिला फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा
इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में संशोधन के अध्यादेश को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है। अब घर खरीदारों को फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा मिल गया है।
क्या हैं क्रेडिटर के मायने ?
– ग्राहक बिल्डर को पहले पैसा देते हैं और उन्हें सालों बाद घर का पजेशन मिलता है। इस तरह देखा जाए तो प्रोजेक्ट तैयार होने में कस्टमर का पैसा भी शामिल होता है। यही वजह है कि उन्हें क्रेडिटर का दर्जा देने की सिफारिश की गई।
कैसे मिलेगा फायदा ?
– घर का पजेशन नहीं मिला है इस बीच बिल्डर दिवालिया हो चुका है तो खरीदारों को नुकसान नहीं होगा। बिल्डर की संपत्ति बेची जाएगी तो घर खरीदारों को भी हिस्सा दिया जाएगा।
पहले क्या प्रावधान था ?
– किसी बिल्डर के दिवालिया घोषित होने पर हर्जाना मिलने के मामले में ग्राहकों का नंबर सबसे बाद में आता था।
– दिसंबर 2016 में दिवालिया कानून लागू हुआ था। इसमें घर खरीदारों के अधिकारों के मुद्दे पर लगातार राय-मशविरा चल रहा था।
– सरकार की ओर से गठित समिति ने कानून में संशोधन कर घर खरीदारों के अधिकार बढ़ाने समेत अन्य सुझाव दिए थे। जिसे पिछले महीने कैबिनेट ने मंजूरी दी और अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया।
देशभर के हजारों ग्राहक फंसे हुए हैं
– कई बिल्डर्स के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं, जिनमें खरीदारों के लाखों-करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं। हालांकि रेरा के नियम लागू होने के बाद ग्राहकों की सिक्योरिटी बढ़ी है। दिवालिया होने की प्रोसेस के तहत डेवलपर की प्रॉपर्टी बेचकर भरपाई का प्रावधान है लेकिन इसमें खरीदारों को तवज्जो नहीं थी।

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