जम्मू-कश्मीर में 10 साल में चौथी बार राज्यपाल शासन, अमरनाथ यात्रा खत्म होने तक गवर्नर बने रह सकते हैं वोहरा

जम्मू-कश्मीर में अब तक 11 चुनाव हो चुके हैं। राज्य ने 7 बार राज्यपाल शासन देखा
Nationalview.in| Last Modified – Jun 20, 2018, 10:16 AM

Shamshud Duha
o पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस, तीनों ने कहा है कि वे किसी से गठबंधन नहीं करेंगे
o मार्च 2015 में भाजपा के समर्थन से मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने थे, सईद के निधन के बाद मेहबूबा मुफ्ती सीएम बनीं, डिप्टी सीएम का पद भाजपा के पास था
o बताया जाता है कि महबूबा के दबाव में रमजान में सीजफायर हुआ, लेकिन इस दौरान आतंकी हमले बढ़ गए
श्रीनगर.जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और भाजपा की गठबंधन सरकार गिरने के 24 घंटे के अंदर राज्यपाल शासन लगा दिया गया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार सुबह इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने की मंजूरी दे दी। इससे पहले मंगलवार शाम को राज्यपाल एनएन वोहरा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाने के लिए राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजी थी। वोहरा का कार्यकाल जून में खत्म हो रहा है। लेकिन कहा जा रहा है कि वे अमरनाथ यात्रा तक गवर्नर बने रह सकते हैं। राज्य में पिछले 10 साल में यह चौथी बार राज्यपाल शासन लगा है। पीडीपी और भाजपा के बीच सवा तीन साल पहले गठबंधन हुआ था।
– भाजपा ने मंगलवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन तोड़कर महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। भाजपा के सभी मंत्रियों ने मंगलवार को इस्तीफे दे दिए। महबूबा ने भी इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस और पीडीपी ने एकदूसरे के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी किसी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।
दो वजह जो भाजपा ने बताईं : राम माधव ने कहा, ‘‘घाटी में आतंकवाद, कट्टरपंथ, हिंसा बढ़ रही है। ऐसे माहौल में सरकार में रहना मुश्किल था। रमजान के दौरान केंद्र ने शांति के मकसद से ऑपरेशंस रुकवाए। लेकिन बदले में शांति नहीं मिली। जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के बीच सरकार के भेदभाव के कारण भी हम गठबंधन में नहीं रह सकते थे।’’
मतभेद की दो असल वजहें: पहली- रमजान के दौरान सुरक्षाबल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन रोक दें, इसे लेकर भाजपा-पीडीपी में मतभेद थे। महबूबा के दबाव में केंद्र ने सीजफायर तो किया लेकिन इस दौरान घाटी में 66 आतंकी हमले हुए, पिछले महीने से 48 ज्यादा। ऑपरेशन ऑलआउट को लेकर भी भाजपा-पीडीपी में मतभेद था। दूसरी- पीडीपी चाहती थी कि केंद्र सरकार हुर्रियत समेत सभी अलगाववादियों से बातचीत करे। लेकिन, भाजपा इसके पक्ष में नहीं थी।
पूरी खबर यहां पढ़ें: भाजपा ने कहा- आतंकवाद बढ़ने से गठबंधन में रहना मुश्किल था, वोहरा ने राज्यपाल शासन लगाने के लिए रिपोर्ट भेजी
जम्मू-कश्मीर में अब तक 11 चुनाव हुए, राज्य ने 8 बार राज्यपाल शासन देखा
कब-कब लगा राज्यपाल शासन
पहली 26 मार्च, 1977 से 9 जुलाई 1977
दूसरी 6 मार्च 1986 से 7 नवंबर 1986
तीसरी 19 जनवरी 1990 से 9 अक्टूबर 1996
चौथी 18 अक्टूबर 2002 से 2 नवंबर 2002
पांचवीं 11 जुलाई 2008 से 5 जनवरी 2009
छठवीं 8 जनवरी 2015 से 1 मार्च 2015
सातवीं 7 जनवरी 2016 से 4 अप्रैल 2016
आठवीं 20 जून 2018
1957-1977: पहले दो चुनावों में नेशनल कॉन्फ्रेंस तो तीसरे और चौथे में कांग्रेस जीती
– पहली बार 1957 में चुनाव। नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को 75 में 68 सीट मिली। बख्शी गुलाम मो. वजीर-ए-आजम बने। 62 में भी नेकां जीती। 1967-72 में कांग्रेस जीती। 1975 में इंदिरा का नेकां के शेख अब्दुल्ला से करार हुआ। कांग्रेस के मीर कासिम ने अब्दुल्ला के लिए कुर्सी छोड़ दी।
1977-1982: कांग्रेस ने अब्दुल्ला सरकार गिराई पहली बार राज्यपाल शासन लगा
– 1977 में कांग्रेस ने समर्थन वापस लेकर अब्दुल्ला सरकार गिराई। पहली बार राज्यपाल शासन लगा। 1977 के चुनावों में नेकां जीती और शेख अब्दुल्ला दोबारा मुख्यमंत्री बनाए गए। 1982 में शेख अब्दुल्ला के निधन पर बेटे फारूक अब्दुल्ला सीएम बने। कांग्रेस की मदद से अब्दुल्ला के बहनोई गुलाम शाह ने सरकार गिरा दी। शाह दो साल सीएम रहे। 6 मार्च, 1986 से 7 नवंबर, 1986 तक राष्ट्रपति शासन रहा।
1986-2002: राज्य में साल 1990 से 1996 तक सबसे लंबा राज्यपाल शासन रहा
– 1986 में हुए चुनावों में फिर नेकां जीती और फारूख सीएम बने। 1990 में जगमोहन को राज्यपाल बनाने के विरोध में इस्तीफा दे दिया। 1996 तक राज्यपाल शासन रहा। 1996 के चुनाव में फिर नेशनल कॉन्फ्रेंस को सफलता मिली। फारूख तीसरी बार सीएम बने।
2002-2018: गठबंधन सरकारों का दौर शुरू, चार बार राज्यपाल शासन लगा
– 2002 चुनाव में कांग्रेस-पीडीपी की सरकार बनी। मुफ्ती सईद सीएम बने। 3 साल के बाद कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद सीएम बने। पीडीपी ने सरकार गिरा दी।
– 2008 में हुए चुनावों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। नेकां-कांग्रेस की सरकार बनी। उमर अब्दुल्ला सीएम बने।
– 2014 में चुनाव हुए। 2015 में भाजपा-पीडीपी में गठबंधन। पीडीपी के मुफ्ती सईद फिर सीएम बने। उनके निधन के बाद महबूबा राज्य की पहली महिला सीएम बनी।

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