सुप्रीम कोर्ट ने दिया, आम्रपाली ग्रुप को चेतावनी । कहा ज्यादा स्मार्ट न बने एक- एक संपत्ति बेचकर कर देंगे आपको बेघर ।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया, आम्रपाली ग्रुप को चेतावनी । कहा ज्यादा स्मार्ट न बने एक- एक संपत्ति बेचकर कर देंगे आपको बेघर ।

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रियल एस्टेट ग्रुप आम्रपाली को चेतावनी दी। अदालत ने कहा कि आप ज्यादा स्मार्ट न बनें। आपने लोगों को घर के लिए भटकने पर मजबूर किया। हम आपको बेघर कर देंगे। हम आपकी एक-एक संपत्ति बेच देंगे। आम्रपाली ग्रुप पर 40 हजार खरीदारों को वक्त पर घर का पजेशन न दे पाने का आरोप है। खरीददारों ने घर मिलने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने कहा, “असली समस्या यह है कि आपने लोगों को घर का पजेशन देने में देरी की। आपको सभी प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी और आप इसकी व्यवस्था कहां से करेंगे?” इस पर ग्रुप ने जवाब दिया कि प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए हमें करीब 4 हजार करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। बेंच ने पूछा कि आपने 2764 करोड़ रुपए का फंड डायवर्ट किया है, उसे कैसे वापस करेंगे?

बिजली कंपनियों को कनेक्शन जोड़ने के निर्देश : बेंच ने मौजूदा और 2008 के बाद ग्रुप छोड़ने वाले निदेशकों के बारे में सवाल किए और कहा- 15 दिन के भीतर ग्रुप के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों की अचल संपत्ति का ब्योरा पेश करें। आम्रपाली के प्रोजेक्ट की देखरेख कर रही कंपनियों की जानकारी दें। यह भी बताएं कि इन्होंने कितना फंड जमा किया और कितना खर्च किया। कोर्ट ने बिजली कंपनियों को ग्रुप के दो प्रोजेक्ट को दोबारा कनेक्शन दिए जाने के निर्देश भी दिए। कंपनियों ने भुगतान बकाया रहने पर कनेक्शन काट दिया था।

एनबीसीसी से मांगा प्रस्ताव : 2 अगस्त को नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड (एनबीसीसी) ने अदालत से कहा था कि वो आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए तैयार है। बेंच ने बुधवार को एनबीसीसी से कहा कि 30 दिन के भीतर पुख्ता प्रस्ताव पेश करें और यह भी बताएं कि तय समयसीमा के भीतर किस तरह से प्रोजेक्ट पूरा कर पाएंगे। इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने ग्रुप को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह गंदा खेल खेल रहे हैं और जालसाजी कर रहे हैं। अदालत ने ग्रुप की सभी 40 कंपनियों की अचल संपत्तियों और बैंक अकाउंट अटैच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही 2008 से अब तक के बैंक अकाउंट्स की जानकारी भी मांगी थी और इन्हें सीज करने के निर्देश दिए थे।

Editor :- Shamshud duha

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