एक विधवा के नाम पर फर्जी खाला खोल कर उसमें 1.57 करोड़ से ज्यादा का पैसा जमा कराया।

 

एक विधवा के नाम पर फर्जी खाला खोल कर उसमें 1.57 करोड़ से ज्यादा का पैसा जमा कराया।
बाड़मेर. नीरव मोदी से सुर्खियों में आई पंजाब नेशनल बैंक में अब हर जगह घपले खुलते जा रहे हैं। बैंक के जोधपुर डीजीएम ने बाड़मेर व गागरिया के ब्रांच मैनेजर इंद्रचंद चूंडावत ने एक विधवा के नाम पर फर्जी खाला खोल कर उसमें 1.57 करोड़ से ज्यादा का पैसा जमा कराया। यह पैसा केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की सब्सिडी का था। खुद ही खाते से पैसे उठा लेता था। केस वाउचर व अन्य दस्तावेज भी गायब मिले है।
इसके अलावा चूंडावत ने बाड़मेर ब्रांच से 26 जनों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में 62 लाख से ज्यादा का लोन दिया, वे सभी लोग संदिग्ध है तथा बिना जांच-पड़ताल के लोन देने से उसकी रिकवरी नहीं हो पा रही है। सीबीआई जोधपुर ने इस संबंध में दो केस दर्ज किए है। चूंडावत के पाली स्थित घर और मौजूदा पोस्टिंग आबूरोड में होने के कारण वहां भी छापे मारे हैं। उसके ठिकानों से जब्त दस्तावेजों के आधार पर पूरे घोटाले की जांच शुरू हुई है।
पत्नी, भाई व मां के खाते में डाले थे 21.93 लाख रुपए
पीएनबी चौहटन के तत्कालीन मैनेजर गौतम सोनी एवं अन्य ने 12 खाताधारकों के नाम केसीसी, मुद्रा, कल्याणी एवं कृषक सारथी स्कीम के तहत सब्सिडाइज्ड लोन स्वीकृत किया। जब लोन की राशि इनमें खातों में जमा हो गई तो अधिकांश रकम मैनेजर ने पत्नी मनीषा, भाई अनिल व मां चंद्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी थी। मामला सीबीआई के पास है।
नोटबंदी में 8 करोड़ जमा कराने वाले की फर्मों पर अायकर छापा
नोटबंदी के दौरान बैंकों में करोड़ों की राशि जमा कराने वाले कारोबारी व नौकरीपेशा आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के निशाने पर हैं। पिछले छह माह से आयकर विभाग के रेड आैर सर्वे की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है, शुक्रवार को आयकर की कई टीमों ने अजमेर शहर के एक बड़े सर्राफा कारोबारी व उसके परिवार की कई फर्मों पर शिकंजा कसा। एकाएक हुई रेड की कार्रवाई से अन्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया। शहर में कार्रवाई के खौफ में कई बड़ी फर्मों के शटर गिर गए।
पाली की जिस विधवा सुगना के नाम खाता खोला, 1.57 करोड़ की सब्सिडी हड़पी
मैनेजर चूंडावत के खिलाफ यह दूसरा केस है जब वह गागरिया में ब्रांच मैनेजर था। उस वक्त सुगना देवी विधवा चौथाराम के नाम से एक फर्जी बैंक अकाउंट खोला गया। खाते में दिया गया पता पाली का है, जबकि खाता गागरिया में खोला गया है। इस खाते में अगस्त 11 से जून 12 के बीच 1,57,08,560 रुपए जमा हुए। यह जमाएं केंद्र सरकार के विभिन्न योजनाओं की सबसिडी के रूप में हुई थी। इंदिरा आवास सहित अन्य योजनाओं का पैसा बैंक खाते से सुगना के खाते में डाल देता था, फिर खुद ही उठा लेता। सीबीआई ने जब सुगना का पता किया तो वह मिली ही नहीं, उसका पता फर्जी निकला। बैंक में इन जमाओं का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला। जैसे मनी-ट्रांसफर और कैश वाउचर जैसे कोई दस्तावेज नहीं थे। यह पैसा इस खाते से निकल भी गया, इसलिए सीबीआई को संदेह हुआ कि यह खाता भी मैनेजर ने ही खुलवाया और पैसा भी उसी ने निकाला है। इसलिए सीबीआई ने मैनेजर के पाली स्थित घर और फिलहाल उसकी पोस्टिंग आबूरोड पीएनबी में है, वहां छापे मार कर तलाशी ली। ब्यूरो टीम ने दोनों जगहों से काफी संख्या में प्रोपर्टी के दस्तावेज जब्त किए हैं, उनकी छानबीन की जा रही है।
2017 में पीएनबी चौहटन के मैनेजर सोनी ने परिजनों के खाते में डाले थे 21 लाख रु.
पीएनबी चौहटन के तत्कालीन मैनेजर गौतम सोनी एवं अन्य ने 12 खाताधारकों के नाम केसीसी, मुद्रा, कल्याणी एवं कृषक सारथी स्कीम के तहत सब्सिडाइज्ड लोन स्वीकृत किया। जब लोन की राशि इनमें खातों में जमा हो गई तो इसमें से अधिकांश रकम मैनेजर ने अपनी पत्नी मनीषा, भाई अनिल और मां चंद्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी थी। यह मामला भी सीबीआई के पास विचाराधीन है।
65.25 लाख का मुद्रा लोन बांटा, अधिकांश एक ही गांव के
चूंडावत सितंबर 2016 से मार्च 2017 तक बाड़मेर पीएनबी के मैनेजर था। उन्होंने 26 जनों को 65.25 लाख रुपए का लोन स्वीकृत किया। जिसमें 62.40 लाख रुपए की रिकवरी बकाया है। पचास हजार रुपए से कम वाला शिशु मुद्रा लोन और पांच से दस लाख वाला तरुण मुद्रा लोन था। चूंडावत ने इसमें 30 हजार से 4 लाख रुपए तक का लोन बांटा था। जिन लोगों को लोन दिया, उनके घर व कारोबार की जगह का कोई वेरिफिकेशन ही नहीं था। प्री और पोस्ट दोनों वेरिफिकेशन नहीं होने से पीएनबी इन लोगों को न तलाश कर पा रही है और न ही रिकवरी। जिन लोगों को लोन दिया है, उनमें अधिकांश एक ही गांव लाखेटाली के है। इनमें भी गडरा के हीराराम को 30 हजार व मैसर्स सांबरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम 3.50 लाख का लोन दिया, ये दोनों बाड़मेर से 100 किमी दूर के रहने वाले हैं। जबकि मुद्रा लोन का नियम है कि लोन लेने वाला बैंक की 25 किमी की परिधि में रहने वाला होना चाहिए

एक विधवा के नाम पर फर्जी खाला खोल कर उसमें 1.57 करोड़ से ज्यादा का पैसा जमा कराया।

बाड़मेर. नीरव मोदी से सुर्खियों में आई पंजाब नेशनल बैंक में अब हर जगह घपले खुलते जा रहे हैं। बैंक के जोधपुर डीजीएम ने बाड़मेर व गागरिया के ब्रांच मैनेजर इंद्रचंद चूंडावत ने एक विधवा के नाम पर फर्जी खाला खोल कर उसमें 1.57 करोड़ से ज्यादा का पैसा जमा कराया। यह पैसा केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की सब्सिडी का था। खुद ही खाते से पैसे उठा लेता था। केस वाउचर व अन्य दस्तावेज भी गायब मिले है।

इसके अलावा चूंडावत ने बाड़मेर ब्रांच से 26 जनों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना में 62 लाख से ज्यादा का लोन दिया, वे सभी लोग संदिग्ध है तथा बिना जांच-पड़ताल के लोन देने से उसकी रिकवरी नहीं हो पा रही है। सीबीआई जोधपुर ने इस संबंध में दो केस दर्ज किए है। चूंडावत के पाली स्थित घर और मौजूदा पोस्टिंग आबूरोड में होने के कारण वहां भी छापे मारे हैं। उसके ठिकानों से जब्त दस्तावेजों के आधार पर पूरे घोटाले की जांच शुरू हुई है।

 

पत्नी, भाई व मां के खाते में डाले थे 21.93 लाख रुपए

पीएनबी चौहटन के तत्कालीन मैनेजर गौतम सोनी एवं अन्य ने 12 खाताधारकों के नाम केसीसी, मुद्रा, कल्याणी एवं कृषक सारथी स्कीम के तहत सब्सिडाइज्ड लोन स्वीकृत किया। जब लोन की राशि इनमें खातों में जमा हो गई तो अधिकांश रकम मैनेजर ने पत्नी मनीषा, भाई अनिल व मां चंद्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी थी। मामला सीबीआई के पास है।

नोटबंदी में 8 करोड़ जमा कराने वाले की फर्मों पर अायकर छापा

नोटबंदी के दौरान बैंकों में करोड़ों की राशि जमा कराने वाले कारोबारी व नौकरीपेशा आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग के निशाने पर हैं। पिछले छह माह से आयकर विभाग के रेड आैर सर्वे की ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है, शुक्रवार को आयकर की कई टीमों ने अजमेर शहर के एक बड़े सर्राफा कारोबारी व उसके परिवार की कई फर्मों पर शिकंजा कसा। एकाएक हुई रेड की कार्रवाई से अन्य कारोबारियों में हड़कंप मच गया। शहर में कार्रवाई के खौफ में कई बड़ी फर्मों के शटर गिर गए।

पाली की जिस विधवा सुगना के नाम खाता खोला, 1.57 करोड़ की सब्सिडी हड़पी

मैनेजर चूंडावत के खिलाफ यह दूसरा केस है जब वह गागरिया में ब्रांच मैनेजर था। उस वक्त सुगना देवी विधवा चौथाराम के नाम से एक फर्जी बैंक अकाउंट खोला गया। खाते में दिया गया पता पाली का है, जबकि खाता गागरिया में खोला गया है। इस खाते में अगस्त 11 से जून 12 के बीच 1,57,08,560 रुपए जमा हुए। यह जमाएं केंद्र सरकार के विभिन्न योजनाओं की सबसिडी के रूप में हुई थी। इंदिरा आवास सहित अन्य योजनाओं का पैसा बैंक खाते से सुगना के खाते में डाल देता था, फिर खुद ही उठा लेता। सीबीआई ने जब सुगना का पता किया तो वह मिली ही नहीं, उसका पता फर्जी निकला। बैंक में इन जमाओं का कोई रिकॉर्ड भी नहीं मिला। जैसे मनी-ट्रांसफर और कैश वाउचर जैसे कोई दस्तावेज नहीं थे। यह पैसा इस खाते से निकल भी गया, इसलिए सीबीआई को संदेह हुआ कि यह खाता भी मैनेजर ने ही खुलवाया और पैसा भी उसी ने निकाला है। इसलिए सीबीआई ने मैनेजर के पाली स्थित घर और फिलहाल उसकी पोस्टिंग आबूरोड पीएनबी में है, वहां छापे मार कर तलाशी ली। ब्यूरो टीम ने दोनों जगहों से काफी संख्या में प्रोपर्टी के दस्तावेज जब्त किए हैं, उनकी छानबीन की जा रही है।

2017 में पीएनबी चौहटन के मैनेजर सोनी ने परिजनों के खाते में डाले थे 21 लाख रु.

पीएनबी चौहटन के तत्कालीन मैनेजर गौतम सोनी एवं अन्य ने 12 खाताधारकों के नाम केसीसी, मुद्रा, कल्याणी एवं कृषक सारथी स्कीम के तहत सब्सिडाइज्ड लोन स्वीकृत किया। जब लोन की राशि इनमें खातों में जमा हो गई तो इसमें से अधिकांश रकम मैनेजर ने अपनी पत्नी मनीषा, भाई अनिल और मां चंद्रा के अकाउंट में ट्रांसफर कर दी थी। यह मामला भी सीबीआई के पास विचाराधीन है।

65.25 लाख का मुद्रा लोन बांटा, अधिकांश एक ही गांव के

चूंडावत सितंबर 2016 से मार्च 2017 तक बाड़मेर पीएनबी के मैनेजर था। उन्होंने 26 जनों को 65.25 लाख रुपए का लोन स्वीकृत किया। जिसमें 62.40 लाख रुपए की रिकवरी बकाया है। पचास हजार रुपए से कम वाला शिशु मुद्रा लोन और पांच से दस लाख वाला तरुण मुद्रा लोन था। चूंडावत ने इसमें 30 हजार से 4 लाख रुपए तक का लोन बांटा था। जिन लोगों को लोन दिया, उनके घर व कारोबार की जगह का कोई वेरिफिकेशन ही नहीं था। प्री और पोस्ट दोनों वेरिफिकेशन नहीं होने से पीएनबी इन लोगों को न तलाश कर पा रही है और न ही रिकवरी। जिन लोगों को लोन दिया है, उनमें अधिकांश एक ही गांव लाखेटाली के है। इनमें भी गडरा के हीराराम को 30 हजार व मैसर्स सांबरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम 3.50 लाख का लोन दिया, ये दोनों बाड़मेर से 100 किमी दूर के रहने वाले हैं। जबकि मुद्रा लोन का नियम है कि लोन लेने वाला बैंक की 25 किमी की परिधि में रहने वाला होना चाहिए

 

 


Posted Time : 11:45:14                                                                                               Posted Date : 2018-02-24

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-Mubarak Khan-
Date : 2018-02-09