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Up में वनाधिकारियों ने पहली बार देखा अजगर का लाइव शिकार

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इटावा। यूं तो अजगर के किसी भी जानवर को शिकार बनाने की तस्वीरें आती ही रहतीं है लेकिन जैसी तस्वीरें उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में खूंखार डाकुओं की शरण स्थली के तौर पर पहचाने जाने वाले चंबल में इस बार सामने आई हैं ऐसी तस्वीरें यहां इससे पहले कभी भी देखी नहीं गई हैं।

इटावा जिले में बकेवर इलाके के गौतमपुरा गांव में शनिवार दोपहर ग्रामीणों ने एक अजगर को नीलगाय के बच्चे को निगलने से पहले मजबूत पकड़ से उसका दम घोटते हुए देखा और यह देख नीलगाय के बच्चे को अजगर के पाश से छुड़ाने का प्रयास भी किया लेकिन अजगर की पकड़ इतनी मजबूत थी कि गांव वाले उसको किसी भी सूरत में मुक्त नहीं करा सके।

इसके बाद उन्होंने स्थानीय वन अफसरों की मदद ली। ग्रामीणों की सूचना पर गौतमपुरा गांव में वन विभाग की टीम लेकर वन रेंज अफसर विवेकानंद दुबे मौके पर पहुंचे।

लखना रेंज के वन रेंज अफसर ने बताया कि उनको शनिवार दोपहर एक बजे गौतमपुरा गांव में अजगर के शिकार करने की सूचना आसपास ग्रामीणों के जरिए मिली। इसी सूचना पर वह अपनी टीम के साथ में गांव में पहुंचे। धान के खेत में अजगर नीलगाय के एक बच्चे को जकड़े हुए था। वह उसको निगलने की तैयारी कर रहा था।

मौके पर पहुंचने के बाद में वन विभाग की टीम ने अजगर से अलग करने की कोशिश की लेकिन बड़ी मुश्किल से अजगर को अलग कर पाई। जिस समय अजगर को उसके शिकार नीलगाय से अलग किया जा रहा था उस समय अजगर ने कई बार वन विभाग की टीम के सदस्यों पर कई दफा हमला भी किया।

वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की तरह ही मशक्कत करके अजगर को नीलगाय के बच्चे को उससे अलग करने की कोशिश की लेकिन तब तक नीलगाय के बच्चे को अजगर अपना शिकार बना चुका था। टीम ने बड़ी मुश्किल से मर चुके नील गाय के बच्चे को अजगर के शिकंजे से छुडाया आैर अजगर को बोरे में बंद कर जंगल में जाकर छोड दिया।

वन विभाग की टीम को काफी मशक्कत इसलिए करनी पड़ी क्योंकि अजगर बहुत ही आक्रामक था जिस शिकार को उसने अपनी जिद में लिया हुआ था उसको वह सही से निगल नहीं पाया और इसीलिए बेहद गुस्से में परलक्षित होता हुआ दिखाई दे रहा था।

दुबे ने बताया कि यह पहला दुर्लभ संयोग ही माना जाएगा क्योंकि इससे पहले अभी तक उन्होंने इस तरह अजगर के शिकार का कोई भी दृश्य नहीं देखा है अमूमन इस तरह की तस्वीरे डिस्कवरी आदि चैनलों मे ही देखीं जाता है लेकिन पहली दफा लाइव शिकार देखा। जिस अजगर ने यहॉ पर नीलगाय के बच्चे को शिकार बनाया वो कम से कम दस फुट लंबा और तीस किलो के आसपास वजनी आंका गया है।

वैसे तो पांच साल मे लखना रेंज में कम से कम 200 के आसपास अजगरों को रेस्कुय किया गया होगा लेकिन पहली दफा ऐसा सामने आया है जिसमें अपनी आंखों से किसी अजगर को दूसरे जानवर को शिकार करते हुए देखा जा रहा था।

उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में स्थिति इस तरह से बिगड़ चुकी है कि हर दूसरे तीसरे दिन एक या दो अजगर गांव में निकल रहे हैं, जिससे लोगो को खासी परेशानी हो रही है।

इटावा के प्रभागीय निदेशक वन सत्यपाल सिंह का कहना है कि ग्रामवासी घर से निकलने से पहले सतर्कता बरतें और सुबह शाम विशेष रूप अलर्ट रहने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि अजगर ऐसा सांप है जो सामान्यता लोगों को नुकसान नहीं पहुचाता है लेकिन जब उसकी जद में कोई आ जाता है तो बचना काफी मुश्किल हो जाता है।

जंगल काटे जाने से अजगर इंसानी बस्तियों का रूख कर रहे हैं। कटान के चलते अजगरों के वास स्थलो को नुकसान हो रहा है इसलिए अजगरो को जहां भी थोडी बहुत हरियाली मिलती है वहीं पर अजगर अपना बसेरा बना लेते हैं।

अजगर एक संरक्षित जीव है। देश में सुडूल-वन प्रजाति के अजगरों की संख्या काफी कम हैं। अजगर एक संरक्षित प्राणी है। यह मानवीय जीवन के लिए बिलकुल खतरनाक नहीं है परंतु सरीसृप प्रजाति का होने के कारण लोगों की ऐसी धारणा बन गई और इसकी विशाल काया के कारण लोगों में अजगर के प्रति दहशत फैल गई है।

देश में इस प्रजाति के अजगरों की संख्या काफी कम होने के कारण कारण इन्हें संरक्षित घोषित कर दिया गया है परंतु इसके बावजूद इनके संरक्षण के लिए केंद्र अथवा राज्य सरकार ने कोई योजना नहीं की है। इसलिए पकडे जाने के बाद छोटे बडे अजगरों को संरक्षित वन क्षेत्रों में सुरक्षात्मक तौर पर छोड दिया जाता है।

चंबल घाटी के यमुना तथा चंबल क्षेत्र के मध्य तथा इन नदियों के किनारों पर सैकड़ों की संख्या में अजगर हैं हालांकि इन अजगरों की कोई तथ्यात्मक गणना नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि अजगरों के शहरी क्षेत्र में आने की प्रमुख वजह यह है कि जंगलों के कटान होने के कारण इनके प्राकृतिक वास स्थल समाप्त होते जा रहे हैं।

जंगलों में जहां दूब घास पाई जाती है, वहीं यह अपने आशियाने बनाते हैं। अब जंगलों के कटान के कारण दूब घास खत्म होती जा रही है। इसके अलावा अजगर वहां रहते हैं जहां नमी की अधिकता होती है परंतु जंगलों में तालाब खत्म होने से नमी भी खत्म होती जा रही है।

इटावा मे करीब 10 साल से एक के बाद एक करके खासी तादात मे अजगर निकल रहे हैं। इस अवधि मे करीब 500 से अधिक अजगर निकल चुके हैं। करीब दो फुट से लेकर 20 फुट और पांच किलो से लेकर 80 किलो से अधिक वजन वाले अजगर निकले हैं।

Editor :- Shamshud duha

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