यूनुस मोहानी अपनीं पोस्ट में meToo पर क्या खूब लिखते है

यूनुस मोहानी अपनीं पोस्ट में meToo पर क्या खूब लिखते है

दिल्ली। आपको यह शब्द तो बहुत अच्छी तरह से याद होंगे क्योंकि इनकी बड़ी ज़रूरत पड़ती है अब हमारे नवजवानों को चाहे वह युवक हो या युवती लव यू ,मिस यू ………..और इसका जवाब वही चिरपरिचित मी टू मगर अब यह शब्द सिर्फ जवाब नहीं बचा है बल्कि अज़ाब बन कर सामने आया है .

इस शब्द के अज़ाब बन जाने से दो तरफा बहस चल रही है हालाँकि खुल कर कोई इसका विरोध भी नहीं कर पा रहा है लेकिन सच यह है कि लोग दबी ज़ुबान में कुछ कह तो ज़रूर रहे हैं .
आइये इस मी टू पर बात करने से पहले भारतीय दंड सहिंता से भी कुछ जाना जाये तो कुछ बातें बहुत कुछ समझा जायेगी भारतीय दंड सहिंता की धारा- 354A जो इस अपराध के लिए है .
लैंगिक उत्पीडन और लैंगिक उत्पीडन के लिए दण्ड –
(1)निम्न कार्यों —
i-अवांछनीय एवं सुव्यक्त लैंगिक संबंधो को बनाने को अंत्ग्रस्त करने वाला शारीरिक संपर्क एवं अंग्क्रियायें या 
ii-यौन स्वीकृत की मांग या अनुरोध ,या 
iii-स्त्री की इच्छा के विरूद्ध अश्लील साहित्य दिखाना ,या 
iv-लैंगिक आभासी टिप्पड़ियाँ करना 
में से कोई कार्य करने वाला लैंगिक उत्पीडन के अपराध का अपराधी होगा .
(2) कोई पुरुष जो उपधारा (1)के खंड (i)या खंड (ii)या खंड (iii)में विनिर्दिष्ट अपराध कारित करेगा ,कठोर कारावास से,जिसकी अवधी तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
(3)कोई पुरुष जो उपधारा (1)के खंड (iv)में विन्र्दिष्ट अपराध कारित करेगा ,दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से ,जिसकी अवधी एक वर्ष की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
यह है अपराध और दण्ड का लेखा जोखा आई पी सी की धारा 354- A को अपराधिक कानून संशोधन अधिनियम द्वारा 3 फ़रवरी 2013 ,से दण्ड सहिंता से प्रभावी किया गया है इसकी सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत इसका संज्ञान ले सकती है लेकिन यह धारा ज़मानती है इसलिए तुरंत ज़मानत मिल सकती है .
धारा 354 B – किसी महिला को निवस्त्र करने के उद्देश्य से उसपर हमला या अपराधिक बल का प्रयोग करना 
इस अपराधिक कृत को करने वाला तीन साल या अधिकतम 7 साल के कारावास से दण्डित किया जायेगा और यह धारा ग़ैर ज़मानती है पुलिस के ऊपर है कि अगर सजा 3 साल से कम है तो वह अगर चाहे तो अपराधी को तुरंत गिरफ्तार कर सकती है .
धारा 354 C- तांक झाँक या छिप कर देखना 
कोई व्यक्ति किसी महिला को छुप कर देखेगा या उसके फोटो लेगा या उसके फोटो का दुरूपयोग करेगा तो प्रथम आशय के लिए एक वर्ष का कारावास और दुसरे आशय हेतु कम से कम तीन वर्ष और अधिक से अधिक 7 वर्ष के कारावास से या जुर्माने या दोनों से दण्डित होगा .

धारा 354 D –पीछा करना 
यदि कोई व्यक्ति किसी महिला के स्पष्ट संकेत के बावजूद किसी महिला से बात करने या पीछा करने का प्रयास करता है इलेक्ट्रानिक संचार माध्यमो की मदद से महिला की निगरानी का प्रयास करता है उसकी इच्छा के विरुध तो पहली बार में 3 साल का कारावास और दूसरी बार में 5 साल या जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जायेगा .
धारा 354 की ख़ास बात यह है कि इसमें महिला का आरोप लगा देना ही काफी है खुद को बेगुनाह साबित करने का सारा भार आरोपी पर है .
सिर्फ इतना ही नहीं हमारे देश में हालाँकि महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण,प्रतिषेध एवं प्रतितोष ) अधिनियम 2013 भी मौजूद है.

खैर यह बात थी कानून की अब बात करते हैं मी टू की इसका इतिहास तो आप जान ही गए होंगे लगातार तो सुन भी रहे हैं पढ़ ही रहे हैं लेकिन एक बार मै भी बता दूँ इस अभियान कि शुरवात 2006 में हालीवुड से हुई थी इसकी शुरुवात अमेरकी सिविल राइट्स एक्टिविस्ट तराना बर्क ने की थी और हमारे देश में इसकी शुरुवात तनुश्री दत्ता ने की नाना पाटेकर पर मी टू करके और अब यह राजनैतिक हलके में उथल पुथल मचा रहा है अकबर को इस बार सजा मिल गई मुगलों के अकबर ने हालाँकि अनारकली को दीवार में चुनवा दिया था लेकिन अब दौर बदल चूका है अनारकली के दौर में आई लव यू तो था लेकिन शायद मी टू नहीं था अगर वह आज होती तो ज़रूर कहती मी टू यह एक प्रकार का भद्दा हास्य का जुमला ही था जिसकी यहाँ ज़रूरत इसलिए आन पड़ी क्योंकि क़ानून बहुत नीरस होता है और दिमाग थका देता है .

अब बात करते हैं मी टू के दूसरे पहलू पर हालाँकि हमारे यहाँ भारतीय समाज में माना जाता है कि महिला अपनी गरिमा और अपनी इज्ज़त को खुद नहीं उछाल सकती लिहाज़ा जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं या लग रहे हैं सब सच होंगे ही .
लेकिन इस देश में विष कन्याओं का भी उल्लेख इतिहासकार करते हैं और विश्वामित्र की तपस्या किस तरह भंग की गई आप जानते ही होंगे विश्वामित्र की तपस्या की जानकारी जब इंद्र को हुई तब वह विश्वामित्र की तपस्या को देखकर काफी हैरान हो गए थे हैरानी के साथ-साथ इंद्र को भय भी सताने लगा कि उनका अब अस्तित्व कहीं ख़त्म ना हो जाए.
इंद्र सोच रहे थे कि शायद विश्वामित्र कठोर तपस्या कर नए संसार कि साधना का प्रयास कर रहे हैं इंद्र यह सोच रहे थे कि यदि विश्वामित्र की तपस्या सफल हो गई तो विश्वामित्र ही संपूर्ण सृष्टि के देव बन जाएंगे विश्वामित्र अपनी तपस्या में इतने मग्न थे कि उनकी तपस्या को भंग करने का साहस किसी में भी नहीं था इंद्र ने विश्वामित्र की तपस्या भंग करने की एक योजना बनाई. तपस्या को भंग करने के लिए स्वर्ग की एक सुंदर अप्सरा मेनका को याद किया. इंद्र ने उसे नारी का अवतार लेकर मृत्यु लोक में रहने का आदेश दिया और उनसे कहा कि वह अपने सौंदर्य से विश्वामित्र की तपस्या भंग करें और उन्हें अपनी और आकर्षित करें इंद्र की आज्ञा पाकर स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा और अपनी सुरीली आवाज के लिए मशहूर मेनका विश्वामित्र के सामने गई.
जब मेनका विश्वामित्र के सम्मुख गई तो वह विचार करने लगी कि आखिर किस तरह इस ऋषि को अपनी और आकर्षित किया जाए और उनकी तपस्या को भंग किया जाए मेनका एक अप्सरा थी लेकिन विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए उन्होंने एक नारी का अवतार लिया था जिस में वह सभी गुण परिपूर्ण थे जो किसी नारी में होने चाहिए इसके साथ ही मेनका अपने आप में ही आकर्षण का केंद्र भी थी क्योंकि उनकी सुंदरता इतनी अद्भुत थी कि कोई भी उसे देखकर उसकी ओर आकर्षित हो जाता था
भले ही मेनका सबसे गुणवान और सुंदरता में सबसे सुंदर थी लेकिन महर्षि विश्वामित्र की तपस्या को भंग करना भी इतना आसान कार्य नहीं था इतने मुश्किल काम होने के बावजूद भी इंद्र की आज्ञा का पालन करने के लिए और इंद्रलोक में अपनी एक पहचान बनाने के लिए और अपना सिक्का चलाने के लिए मेनका भी यह अवसर खोना नहीं चाहती थी मेनका ने ऋषि विश्वामित्र को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भरसक प्रयास किया कभी वह विश्वामित्र की आंखों का केंद्र बन जाती तो कभी हवा के झोंकों के साथ अपने कपड़ो को उड़ने देती है ताकि ऋषि की नजर उन पर जम जाए और वह उनकी ओर आकर्षित हो जाए.
लेकिन मेनका यह भूल गई थी कि तप करते-करते विश्वामित्र का शरीर कठोर बन चुका था और शरीर में किसी भी प्रकार की भावना नहीं थी लेकिन अप्सरा के निरंतर और भरसक प्रयास से विश्वामित्र के शरीर में धीरे-धीरे परिवर्तन होने लगा. मेनका के प्रयास से विश्वामित्र के शरीर में काम शक्ति का संचार होने लगा और देखते ही देखते एक समय ऐसा आया जब विश्वामित्र अपने निश्चय को भूलकर तप को छोड़ कर खड़े हो गए और सृष्टि के बदलाव को भूलकर वह स्त्री से प्यार करने में मगन हो गये जो अप्सरा ने सोचा था बिल्कुल वैसा ही हुआ महर्षि अप्सरा के प्यार में पड़ गए थे लेकिन वह यह नहीं जानते थे वह अप्सरा मेनका है वह उनके जाल में फंस चुके हैं.
यह एक तपस्वीय के तप भंग होने की कथा है इसका मी टू कर रही किसी भी पीड़ित से कोई लेना देना नहीं है लेकिन इस कथा का अपना महत्व है और जो लोग इस महत्व को समझते हैं उनके लिए इस कथा में संदेश भी है .
मी टू अब क्यों और मी टू के बाद कानून का सहारा क्यों नहीं ? क्यों सब कुछ सोशल मीडिया पर ही ?सवाल यह है हाँ यह सच है कि समाज का डर और बंदिशों और बेड़ियों में वापस क़ैद किये जाने का भय हमें मी टू तक लाया है लेकिन जानू आई लव यू की बात भी कुछ गलत तो नहीं .सवाल यह है कि आखिर अब पुरुष अपनी इज्ज़त कहाँ बचायेंगे ?अगर उनपर मी टू का खतरा मंडराएगा तो बराबरी की बात क्यों की जा रही है ?आपको हर काम में बराबरी चाहिए तो सज़ा में क्यों नहीं कानून में क्यों नहीं ?यह वह सवाल है जो मी टू के बाद दबी जुबान में उठ रहे हैं यानि बात एक तरफ़ा नहीं है कुछ पक्ष में हैं तो कुछ विपक्ष में भी खैर अब डरिये अगर कोई आई लव यू के बाद कहे मी टू क्योंकि कहीं जान ही ना ले ले अभी के जानू की मी टू …….

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