
Iran और United States के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। हालिया बयानबाजी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आई है और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सप्लाई बाधित होने की आशंका और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ी है। हालांकि, ईरान द्वारा वैश्विक सप्लाई पूरी तरह रोकने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह के बयानों ने बाजार में अनिश्चितता जरूर बढ़ा दी है।
इसका सीधा असर India जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल में इजाफा और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
आर्थिक जानकारों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो भारत के आयात बिल पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। ₹16,000 करोड़ तक का अनुमान इसी संभावित परिदृश्य पर आधारित बताया जा रहा है।
फिलहाल, स्थिति पूरी तरह बयानबाजी और वैश्विक संकेतों पर निर्भर है। आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक हालात और सप्लाई की स्थिति तय करेगी कि तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं।